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द वर्ड्स ब्रिज

 

संपादक
डॉ. राजकुमारी ‘राजसी’
devsakshipublication@gmail.com
लेखक के बारे में

नाम- सुनील पंवार
पद – राजकीय शिक्षक
शिक्षा: – कला स्नातक(B.A), विधि स्नातक(LL.B) शिक्षा में स्नातक(B.ED)
प्रकाशन- दो पुस्तकें प्रकाशित
प्रथम कहानी संग्रह ‘एक कप चाय और तुम’ सृष्टि बेस्ट सेलर अवॉर्ड 2020 से सम्मानित।
देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व लेख प्रकाशित।
सम्मान:- स्व. ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति सम्मान, सृष्टि बेस्टसेलर अवॉर्ड, सूरजपाल चौहान सृजन साहित्य सम्मान, जैसे कई साहित्य सम्मानों से सम्मानित।
देश के कई राज्यों में कहानी ‘आख़री कॉल’ का पाँच बार नाटय मंचन हो चुका है।

 

खाली पन्नें

 

मेरी हसरत थीं
मुझे उतने ही खाली पन्नें मिले
जितने मिले ज़िन्दगी के दिन
ताकि लिख सकूँ क़यामत
के दिन का भी हस्र।

 

खाली पन्नें जिनमें लिख सकूँ मैं
अनेक किस्से, कविताएँ
प्रेमकथाएँ और शायरी।

जिसके हर पन्नें पर हो अंकित
प्रेम का एक अध्याय
हर हर्फ़ में लिखी जाए
एक तहरीर।

 

कागज़ पर बुने जाएं
हज़ारों ख़्वाब और
उन ख़्वाबों में मिल सकूँ
तुमसे हर रोज़।

मेरे टेबल पर रखी है
एक खाली डायरी
जिसमें मिले हैं वे
खाली पन्नें जो लिखने है
ज़िन्दगी के लिए,
ज़िन्दगी के अंत तक।

 

शायद! उस डायरी को मैं
पूरा लिख नहीं पाऊँगा,
अधूरा छोड़ नहीं पाऊँगा,
इसलिए बेहतर है उसे छोड़ देना।

मैंने छोड़ दिया है
हर पन्ना खाली
ताकि लिखी जा सके कभी
भूली बिसरी प्रेमकथा
की कोई इबारत।

 

लेकिन इसके हर कोरे
कागज़ पर लिखा है मैंने कुछ
तो जरूर।
ये अनलिखी, अनकही
इबारत तो बिल्कुल नहीं है।

जब भी तुम पलटोगी इस
डायरी के खाली पन्नें,
तो तुम पढ़ना,
जो मैं लिख नहीं पाया,
तुम पढ़ना जो
मैं कह नहीं पाया।

 

तुम पढ़ना बे-लफ़्ज़ों
की इस इबारत को
तुम समझना इसके
हर अल्फ़ाज़ को।
तुम समझ लेना कि
मैंने लिखी है इसमें
महज़ ‘ख़ामोशी’ मेरी।

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